विश्व क्षय रोग दिवस - 24 मार्च 2026
हर वर्ष 24 मार्च को पूरी दुनिया विश्व क्षय रोग दिवस मनाती है, जिसका उद्देश्य एक गंभीर संक्रामक बीमारी—क्षय रोग (टीबी)—के प्रति जागरूकता फैलाने और इसके उन्मूलन के प्रयासों को तेज करने के लिए समर्पित है। टीबी आज भी विश्व की सबसे घातक बीमारियों में से एक है। यह रोग पूरी तरह से रोकथाम योग्य और उपचार योग्य होने के बावजूद आज भी लाखों लोगों को प्रभावित कर रहा है, विशेषकर विकासशील देशों में।
आज विश्व क्षय रोग दिवस के अवसर पर डॉ राजवीर कुलदीप, आचार्य एव नोडल ऑफिसर, श्वास एव क्षय रोग विभाग, जेएलएन मेडिकल अजमेर ने बताया कि यह दिन 1882 में जर्मन वैज्ञानिक रॉबर्ट कोच के द्वारा टीबी के जीवाणु की खोज की ऐतिहासिक उपलब्धि की याद में मनाया जाता है। उनकी इस खोज ने इस बीमारी के निदान और उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण आधार प्रदान किया। फिर भी, एक सदी से अधिक समय बीत जाने के बाद भी टीबी आज एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। वैश्विक स्तर पर अभी भी टीबी रोग मृत्यु के संक्रामक कारणों में से नंबर एक जानलेवा बीमारी है। दुनिया भर की लगभग एक-चौथाई आबादी टीबी से संक्रमित है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में दुनिया भर में लगभग 83 लाख (8.3 million) लोग टीबी से प्रभावित हुए एव हर साल लगभग 12 लाख से अधिक लोगों की मृत्यु टीबी से होती है । दुनिया के कुल टीबी मरीजों में से लगभग 25% मामलो के साथ भारत दुनिया का सबसे अधिक टीबी प्रभावित देश बना हुआ है।
डॉ राजवीर ने बताया कि क्षय रोग मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है, लेकिन यह शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल सकता है। यह संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से हवा के माध्यम से फैलता है। इसके प्रमुख लक्षणों में दो सप्ताह से लंबी खांसी, शाम के समय बुखार का आना, रात के समय पसीना आना एव वजन का कम होना शामिल है । इन लक्षणों को 4S Symptoms of TB भी कहते है। इन लक्षणों के आधार पर टीबी की प्रारंभिक स्क्रीनिंग की जाती है एव मरीज की समय पर जांच और उचित उपचार से इस रोग को नियंत्रित किया जा सकता है।
वर्ष 2026 की थीम
विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा घोषित विश्व क्षय रोग दिवस 2026 का आधिकारिक विषय (थीम) है "हाँ! हम टीबी को समाप्त कर सकते हैं: देशों के नेतृत्व में, लोगों की शक्ति से"। ("Yes! We Can End TB: Led by countries, powered by people," ) यह विषय राष्ट्रीय नेतृत्व, समुदाय-संचालित प्रयासों और टीबी महामारी से निपटने में प्रगति को गति देने की तत्काल आवश्यकता पर बल देता है, विशेष रूप से निवेश और नवाचार में वृद्धि के माध्यम से।
2026 की थीम के प्रमुख पहलू
"देशों के नेतृत्व में": राष्ट्रीय टीबी कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने के लिए उच्च स्तरीय राजनीतिक प्रतिबद्धता और नेतृत्व का आग्रह करता है |
"लोगों द्वारा संचालित": यह सामुदायिक सहभागिता, पीड़ितों को सहायता प्रदान करने और इस बीमारी से जुड़े कलंक को कम करने पर केंद्रित है।
"हां! हम टीबी को खत्म कर सकते हैं": स्टॉप टीबी पार्टनरशिप के अनुसार, यह अभियान पिछले वर्षों की आशा और कार्रवाई की भावना को आगे बढ़ाता है, और इस बात पर जोर देता है कि साझा जिम्मेदारी के माध्यम से टीबी पर काबू पाना संभव है।
भारत सरकार की पहल: 2026 में तेज होते प्रयास
डॉ राजवीर लगभग 12 वर्षों से राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के नोडल ऑफिसर के रूप में अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे है । उन्होंने बताया कि भारत सरकार राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के माध्यम से टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसके तहत मुफ्त जांच, दवाइयां, पोषण सहायता, घर-घर स्क्रीनिंग अभियान और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
इस वर्ष 2026 में भारत सरकार राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP)के माध्यम से निम्न प्रयासों को और तेज कर रही है:
• डिटेक्ट–ट्रीट–प्रिवेंट रणनीति के माध्यम से मरीजों की जल्दी पहचान और इलाज
• टीबी से संबंधित सहवर्ती रोगों (Comorbid diseases) का शीघ्र पता लगाना और उपचार करना
• नि-क्षय पोषण योजना के तहत मरीजों को आर्थिक सहायता
• प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के जरिए जनभागीदारी बढ़ाना
• Ni-kshay पोर्टल द्वारा डिजिटल निगरानी
• AI आधारित जांच और नई तकनीकों का उपयोग
• टीबी मुक्त पंचायत अभियान के माध्यम से गांव स्तर पर उन्मूलन
सरकार के इन सतत् प्रयासों से लाखों नए मरीजों की पहचान और समय पर इलाज संभव हुआ है। फिर भी सामाजिक कलंक (Social stigma), जानकारी की कमी, अधूरा इलाज, कुपोषण और गरीबी तथा दवा प्रतिरोधी टीबी (Drug resistant TB) जैसी समस्याएं अभी भी चुनौती बनी हुई हैं।
समाधान: जागरूकता ही सबसे बड़ी शक्ति
टीबी के खिलाफ लड़ाई केवल सरकार और चिकित्सा समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी भी है। टीबी उन्मूलन में जनभागीदारी (Community Participation) बेहद महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। समय पर जांच कराना, पूरा इलाज लेना, स्वच्छता और पोषण का ध्यान रखना, टीबी मरीजों के प्रति सहानुभूति, एव उचित वेंटिलेशन सुनिश्चित करना जैसे छोटे-छोटे कदम इस बीमारी को रोकने में मददगार हैं। साथ ही, टीबी से जुड़े सामाजिक कलंक को खत्म करना भी जरूरी है ताकि मरीज बिना डर के इलाज करा सकें।
निष्कर्ष
टीबी एक ऐसी बीमारी है जिसे मिलकर हराया जा सकता है । विश्व क्षय रोग दिवस 2026 हमें यह संदेश देता है कि टीबी के खिलाफ लड़ाई अभी जारी है, लेकिन सही रणनीति, पर्याप्त संसाधन और सामूहिक प्रयासों से ही हम एक स्वस्थ और टीबी-मुक्त भारत का निर्माण कर सकते हैं।
धन्यवाद ।
डॉ राजवीर कुलदीप प्रोफेसर, श्वास एव क्षय रोग विभाग जवाहर लाल नेहरु मेडिकल कॉलेज एव हॉस्पिटल, अजमेर
नोडल ऑफिसर, राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP)
मोबाइल नम्बर : 8949035064

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