डॉ राजवीर कुलदीप
प्रोफेसर, अस्थमा एलर्जी एव श्वास रोग विशेषज्ञ
श्वास रोग विभाग, जवाहर लाल नेहरु मेडिकल कॉलेज एव हॉस्पिटल, अजमेर
मोबाइल नम्बर : 8949035064
भारत में श्वसन संबंधी बीमारियाँ तेजी से बढ़ रही हैं, जिनमें अस्थमा एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में उभर रहा है। बदलती जीवनशैली, बढ़ता प्रदूषण, और जागरूकता की कमी ने इस बीमारी के बोझ को और गंभीर बना दिया है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भारत में लगभग 3.5 से 4 करोड़ लोग अस्थमा से पीड़ित हैं, जो दुनिया में अस्थमा के कुल मरीजों का एक बड़ा हिस्सा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और ग्लोबल बर्डन ऑफ डिज़ीज़ स्टडी के अनुमानों के मुताबिक, अस्थमा वैश्विक स्तर पर भी एक बड़ी समस्या है, जहां 26 करोड़ से अधिक लोग प्रभावित हैं !
आज विश्व अस्थमा दिवस के अवसर पर डॉ राजवीर कुलदीप, आचार्य, श्वास रोग विभाग, जेएलएन मेडिकल अजमेर ने बताया कि अस्थमा एक दीर्घकालिक (क्रॉनिक) बीमारी है, जिसमें वायुमार्ग सूज जाते हैं और संकुचित हो जाते हैं, जिससे सांस लेने में कठिनाई होती है। इसके सामान्य लक्षणों में सांस फूलना, सीने में जकड़न, खांसी और घरघराहट शामिल हैं। अगर समय पर उचित उपचार न मिले तो यह स्थिति कई बार जानलेवा भी हो सकती है !
डॉ राजवीर ने बताया की भारत में अस्थमा के बढ़ते मामलों के पीछे सबसे बड़ा कारण वायु प्रदूषण है। महानगरों से लेकर छोटे शहरों तक, हवा की गुणवत्ता लगातार गिर रही है। धूल, धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन, और वाहन प्रदूषण वायुमार्ग को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा, धूम्रपान, इनडोर प्रदूषण (जैसे रसोई का धुआं), और एलर्जी भी इसके प्रमुख कारण हैं।
हालांकि अस्थमा का पूर्ण इलाज संभव नहीं है, लेकिन इसे नियंत्रित किया जा सकता है। इनहेलर और अन्य दवाओं के नियमित उपयोग से मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं। दुर्भाग्यवश, भारत में अभी भी कई लोग इनहेलर के उपयोग को लेकर भ्रांतियों से ग्रस्त हैं। सामाजिक कलंक और जानकारी की कमी के कारण मरीज समय पर उपचार नहीं लेते।
विश्व अस्थमा दिवस 2026: जागरूकता का संदेश
हर वर्ष मई के पहले मंगलवार को विश्व अस्थमा दिवस मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह आज 5 मई को संपूर्ण विश्व में मनाया जा रहा है !
इस वर्ष की थीम है-
“Access to anti-inflammatory inhalers for everyone with asthma – still an urgent need”
इस थीम का मुख्य उद्देश्य यह संदेश देना है कि अस्थमा के मरीजों को सही और सस्ती दवाएं, विशेष रूप से इनहेल्ड कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स, आसानी से उपलब्ध हों। ये दवाएं न केवल लक्षणों को नियंत्रित करती हैं बल्कि अस्थमा के गंभीर दौरे और मृत्यु के जोखिम को भी कम करती हैं।
यह दिन जागरूकता बढ़ाने, मिथकों को दूर करने और समय पर उपचार के महत्व को समझाने का महत्वपूर्ण अवसर है। विशेष रूप से भारत जैसे देशों में, जहां बड़ी आबादी अभी भी उचित इलाज से वंचित है, इस तरह के अभियान बेहद आवश्यक हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अस्थमा नियंत्रण के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। सबसे पहले, लोगों में जागरूकता बढ़ाना जरूरी है ताकि वे लक्षणों को पहचान सकें और समय पर डॉक्टर से संपर्क करें। दूसरा, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाना होगा ताकि ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में भी उपचार उपलब्ध हो सके। तीसरा, वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे।
स्कूलों और कार्यस्थलों पर भी अस्थमा के प्रति संवेदनशीलता बढ़ानी चाहिए। बच्चों के लिए स्वच्छ वातावरण और नियमित स्वास्थ्य जांच आवश्यक है। साथ ही, सरकार और स्वास्थ्य संस्थानों को सस्ती और सुलभ दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए।
अंततः, अस्थमा केवल एक व्यक्तिगत स्वास्थ्य समस्या नहीं, बल्कि एक सामाजिक और पर्यावरणीय चुनौती है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है। इसलिए, बेहतर इलाज, सही जानकारी और मजबूत नीतियों के माध्यम से ही भारत इस बढ़ते बोझ को कम कर सकता है।

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