अजमेर का ऐतिहासिक जवाहर रंगमंच एक अभूतपूर्व और भावुक पल का गवाह बना। अवसर था 'प्रदेश स्तरीय जाट प्रतिभा सम्मान समारोह' का, जहाँ तालियों की गड़गड़ाहट और भारत माता के जयकारों के बीच अजमेर स्थित राष्ट्रीय तेजा एकेडमी के सीईओ एवं डायरेक्टर डॉ. सुशील भींचर नेतियास को शिक्षा व सामाजिक क्षेत्र में उत्कृष्ट व असाधारण कार्य करने हेतु प्रांतीय स्तर पर राज्य स्तरीय जाट प्रतिभा सम्मान 2026 से नवाजा गया।
समारोह में देश व प्रदेश भर से आए मंत्री ,पूर्व मंत्री, आईएएस,आईपीएस, जनप्रतिनिधि, राजनेता और समाज के प्रबुद्ध जनों का जमावड़ा था। हजारों की संख्या में मौजूद जनसैलाब ने खड़े होकर डॉ. सुशील भींचर नेतियास का अभिवादन किया।
कौन हैं डॉ. सुशील चौधरी, जिनकी चर्चा आज पूरे देश में हो रही है?
-पिछले 10 वर्षों से डॉ. सुशील भींचर नेतियास एक ऐसा मौन महायज्ञ चला रहे हैं, जिसने भारतीय शिक्षा जगत की तस्वीर बदल दी है। जहाँ आज शिक्षा एक बिजनेस बन चुकी है, वहीं डॉ. सुशील भींचर गरीब,असहाय जरूरतमंद और अनाथ बच्चों के लिए 'साक्षात मसीहा' बनकर उभरे हैं।
निःशुल्क शिक्षा एवं हॉस्टल का संकल्प: डॉ. सुशील भींचर नेतियास उन बेबस, अनाथ,गरीब व जरूरतमंद बच्चों के लिए 'आशा की किरण' बनकर उभरे हैं, जिनके लिए बड़ी अकादमियों की फीस चुका पाना एक सपना था। एकेडमी में ऐसे बच्चों को रहने, खाने से लेकर पढ़ाई तक की संपूर्ण निःशुल्क हॉस्टल सुविधा दी जा रही है।
मुफ्त शिक्षा का महासंग्राम:-
सैनिक स्कूल, मिलिट्री स्कूल, नवोदय, NDA, IIT, NEET, UPSC और RPSC जैसी देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं की प्री-फाउंडेशन तैयारी वे इस प्रकार के बच्चों को वो बिल्कुल निःशुल्क करवाते हैं। आज तक करीब सैकङो बच्चै यहा से चयनित हो चूके है।
रहने-खाने की 100% फ्री व्यवस्था: -
इस प्रकार के बच्चों के रहने, खाने और हॉस्टल का पूरा खर्च डॉ. सुशील भींचर नेतियास स्वयं उठाते हैं—छात्रों से एक पैसा भी नहीं लिया जाता।
28 राज्यों से उमड़ता विश्वास: आज देश के कौने-कौने से—कश्मीर से कन्याकुमारी तक, 28 राज्यों के बच्चे अजमेर की धरती पर अपने सपने साकार करने आते हैं।
खुद का सुपरविजन: डॉ. चौधरी हमेशा खुद का सुपरविजन रखते हैं व बच्चों के बीच रहते हैं, उनका मार्गदर्शन करते हैं और उनका हर गार्जियन की तरह ध्यान रखते हैं।
जब नीयत साफ हो और इरादे मजबूत, तो एक अकेला व्यक्ति भी हजारों बच्चों की किस्मत बदल सकता है।" — जवाहर रंगमंच पर मौजूद बड़े अधिकारियों ने डॉ. चौधरी के काम को नमन करते हुए यह शब्द कहे।
अजमेर के इस ऐतिहासिक सम्मान समारोह ने पूरे देश प्रदेश को यह संदेश दे दिया है कि डॉ. सुशील भींचर नेतियास सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि भारत के उन हजारों बच्चों की आस हैं जो पैसों की कमी की वजह से अपने सपने नहीं मारना चाहते।

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